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Showing posts from October, 2025

नक्सलवाद का ढलता सूरज: अब बंदूक नहीं, बेहतर जीवन है नया सपना

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– फहीम खान पिछले कुछ महीनों से देश के अलग-अलग इलाकों, छत्तीसगढ़, झारखंड, महाराष्ट्र और ओडिशा से लगातार नक्सलियों के आत्मसमर्पण की खबरें आ रही हैं. 26 अक्टूबर को कांकेर में 21 माओवादी हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटे, तो 17 अक्टूबर को 9.18 करोड़ रुपये के इनामी और सेंट्रल कमेटी के बड़े नेता रुपेश उर्फ सतीश ने समर्पण किया. अक्टूबर महीने में ही 300 से ज्यादा नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं. सवाल यही है कि आखिर ऐसा क्या बदल गया कि कभी जंगलों में राज करने वाले ये लोग अब खुद पुलिस के सामने हथियार रख रहे हैं? दरअसल अब वक्त बदल चुका है. जो आंदोलन कभी “ज़मीन उसी की जो जोते” के नारे से शुरू हुआ था, वो अब आदिवासियों की नई पीढ़ी के सपनों से मेल नहीं खा रहा. आज के नौजवान के लिए बंदूक नहीं, मोबाइल और मोटरसाइकिल अहम हैं. पहले जहां नक्सल इलाकों में स्कूल, सड़क और नेटवर्क तक नहीं थे, वहां अब शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाएं पहुंच चुकी हैं. विकास की रोशनी ने “लाल गलियारे” को हरित दिशा में मोड़ दिया है. केंद्र सरकार ने भी 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य तय किया है. आंकड़े बताते हैं कि 2010 के मुका...

मिग-21 : 2400 घंटे की उड़ान उम्र वाले जहाज ने भरी 4000 घंटों की उड़ान

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अलविदा ‘टाइगर’ : पार्ट-2 - वायुसेना के इंजीनियरों का कमाल, 20- 22 साल से बढ़ा दी विमान की उम्र रशिया ने जिस मिग-21 लड़ाकू विमान को 2400 घंटों की उड़ान या 40 साल उम्र बताकर भारत को बेचा था, उसी विमान की कार्यक्षमता को समय-समय पर बढ़ाकर भारतीय वायुसेना के इंजीनियरों ने करीबन 4000 घंटों की उड़ान भरी और इस विमान की उम्र 20-22 साल से बढ़ा दी. ऐसा कारनामा करने वाली दुनिया में भारत की ही एकमात्र वायुसेना और उसके इंजीनियर हैं. यह कहना है भारतीय वायुसेना के पूर्व अधिकारी एयर मार्शल हरीश मसंद का. वे लोकमत समाचार से मिग-21 की विदाई के अवसर पर बात कर रहे थे. उनका कहना है कि यदि भारतीय चाहें तो क्या कुछ कर गुजर सकते हैं, इसका प्रमाण ही मिग-21 विमान है. ऐसा इसलिए कि हमने मिग-21 को जब खरीदा तो धीरे-धीरे हमें उसमें कुछ कमिया नजर आईं. जैसे उसमें गन नहीं थी, अकेली मिसाइल थी. भारतीय वायुसेना के इंजीनियरों की तारीफ होनी चाहिए कि उसमें गोंडोला गन लगाई गई. भारत ने मिग-21 का जिस तरीके से इस्तेमाल किया है, वह कहीं पर भी रशिया द्वारा बनाए गए विमान के हिसाब से नहीं था. हमने काफी हद तक आगे बढ़कर इसका अल...

मिग-21 को काॅफिन कहकर नाइंसाफी की गई

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- वीर चक्र से सम्मानित एयर मार्शल हरीश मसंद से लोकमत समाचार की बातचीत अलविदा ‘टाइगर’ : पार्ट-1 मिग -21 जैसा लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना के बेड़े में हमेशा होना चाहिए. इस विमान ने वायुसेना के जांबाज फाइटर पायलटों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर दुश्मनों को धूल चटाई है. लेकिन बावजूद इसके मिग-21 को काॅफिन कहा गया. यह असल में इस विमान के साथ नाइंसाफी ही थी. जो ऐसा कहते थे उन्होंने कभी इसकी खूबियों को जानने की कोशिश नहीं की, और न ही उन्होंने कभी दूसरे विमानों के साथ तुलना में आंकड़े ही पेश किए. यह कहना है वीर चक्र से सम्मानित भारतीय वायुसेना के पूर्व अधिकारी एयर मार्शल हरीश मसंद का. एयर मार्शल मसंद ने कहा कि वे 67 कमिशन्ड अफसर हैं. उन्होंने वैसे तो जरा देरी से ही भारतीय वायुसेना के पहले सुपर सोनिक विमान मिग-21 को उड़ाना शुरू किया था लेकिन अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने लगातार पांच साल में करीबन 1003 घंटे की मिग-21 की उड़ान का अनुभव जरूर लिया है. भारतीय वायुसेना के अन्य लड़ाकू विमानों को भी उड़ाने का उन्हें अनुभव रहा, लेकिन उनका मानना है कि आसमान में जिस जाबांजी के साथ यह विमान अपने टार...