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कैसे कहूं मैं... नेता तुम्हीं हो कल के

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‘इंसाफ की डगर पे, बच्चों दिखाओ चल के ये देश है तुम्हारा, नेता तुम्हीं हो कल के...’  कवि शकील बदायुनी का लिखा ये गीत मैंने अपने बचपन में बहुत सुना है. शायद इसी लिए मेरे जेहन में यह बात पक्की बैठ सी गई है कि इंसाफ की डगर पर चलने वाले बच्चे, कल नेता बनते है. और यह बात अगर सच है तो बच्चों को कल के नेता बनने की सलाह देने वाले शकील बदायुनी यह मानकर चल रहे है कि नेता यानी लीडर ही इस समाज को दिशा देते है. अगर इस बात पर गौर करे तो क्या आज के हमारे नेता सही मायने में ऐसे है? क्या इन नेताओं जैसा बनने के लिए हम अपने बच्चों को इस तरह का कोई गीत सुनाने की भी सोचेंगे?  यह बात आज इसलिए दिमाग में आई है क्योंकि महाराष्ट्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के कद्दावर नेता विजय वडेट्टीवार की एक तस्वीर मुझे सोशल मीडिया पर दिखाई दी. तस्वीर कांग्रेस की बाईक रैली की है. जिसमें विजय वडेट्टीवार अगुवाई करते हुए बाईक चला रहे है. मजे की बात यह है कि वडेट्टीवार ने हेलमेट नहीं पहना है. जबकि बाईक चलाते समय हेलमेट पहनना अनिवार्य है. मतलब नेताजी के लिए बाईक रैली निकालकर स्टाइल मारना जितना जरूरी है, उतना ...

हमारे पूर्वज गधे थे...!

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हमारे पूर्वज गधे थे...! विख्यात वैज्ञानिक चार्ल्स डार्विन का मत था कि प्रकृति क्रमिक परिवर्तन द्वारा अपना विकास करती है. विकासवाद कहलाने वाला यही सिद्धांत आधुनिक जीवविज्ञान की नींव बना. डार्विन को इसीलिए मानव इतिहास का सबसे बड़ा वैज्ञानिक माना जाता है. लेकिन आधुनिक युग के ‘पढ़त मुर्खों’ की बयानबाजी सुनने के बाद लगता है कि डार्विन जैसे विख्यात वैज्ञानिकों के विकासवाद का सिद्धांत पूरी तरह गलत था. डार्विन के अनुसार आज के हम सभी मनुष्य बंदरों का विकसित रूप है. समय अनुसार हुए परिवर्तन के साथ हम में ये बदलाव आया. लेकिन पूर्व आईपीएस अधिकारी तथा पीएचड़ी धारी वर्तमान केंद्रीय मंत्री सतपाल सिंह जी की माने तो डार्विन का ये सिद्धांत न सिर्फ गलत है बल्कि वैज्ञानिकों के नाम पर जो विज्ञान की बातें अबतक हमें पाठ्यक्रमों में बतलाई जाती रही है, वो साफ झूठ थी. सतपाल सिंह जी अकेले ऐसे ‘पढ़त मुर्ख’ होते तो ऐसा शीर्षक लिखने की जरूरत नहीं होती. लेकिन क्या करें हर दिन कोई न कोई केंद्रीय मंत्री, विधायक, सांसद, न्यायाधीश अपनी ‘अकल बांटने’ निकल पड़ता है. कल ही की बात है, एक न्यायाधीश ने कहा था कि ‘मोर के आंसू पीकर म...