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Showing posts from June, 2026

विश्वास की उड़ान और नीट परीक्षा की चुनौती

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- फहीम खान  नीट-यूजी परीक्षा केवल एक प्रवेश परीक्षा नहीं है, बल्कि लाखों विद्यार्थियों और उनके परिवारों के सपनों का आधार है. पिछले वर्ष पेपर लीक प्रकरण ने इस परीक्षा की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे. देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए, न्यायालय तक मामला पहुंचा और अंततः पुनर्परीक्षा का निर्णय लेना पड़ा. ऐसे माहौल में 21 जून को होने वाली नीट री-एग्जाम को लेकर सरकार ने जो विशेष सुरक्षा व्यवस्था की है, वह स्वागतयोग्य कदम है. इस बार प्रश्नपत्रों को भारतीय वायुसेना के सी-17 जैसे विशेष विमान और एमआई-17 हेलीकॉप्टरों के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रीय केंद्रों तक पहुंचाया जा रहा है. वहां से भारतीय डाक विभाग की मदद से उन्हें परीक्षा केंद्रों तक सुरक्षित पहुंचाने की व्यवस्था की गई है. तीन स्तर की सुरक्षा, केंद्रीय बलों की निगरानी, स्थानीय प्रशासन की भागीदारी और हर चरण पर कड़ी मॉनिटरिंग यह दर्शाती है कि सरकार इस बार किसी भी प्रकार की चूक की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहती. भारतीय वायुसेना और भारतीय डाक विभाग, दोनों ही संस्थाएं दशकों से देशवासियों के भरोसे की प्रतीक रही हैं. वायुसेना ने हर संकट की घ...

सोशल मीडिया की दौड़ में खोती संवेदनशीलता

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- फहीम खान एक समय था जब अपने विचारों को समाज तक पहुंचाने के लिए लोगों को चौपाल, बाजार, सभागार या सार्वजनिक मंचों का सहारा लेना पड़ता था. संवाद सीमित था, लेकिन उसमें जिम्मेदारी और संवेदनशीलता भी थी. आज डिजिटल क्रांति ने अभिव्यक्ति के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है. सोशल मीडिया के माध्यम से हर व्यक्ति के हाथ में एक ऐसा मंच आ गया है, जहां वह अपनी बात लाखों लोगों तक आसानी से पहुंचा सकता है. यह बदलाव लोकतंत्र को मजबूत करने वाला है, लेकिन इसके साथ कुछ गंभीर चुनौतियां भी सामने आई हैं. आज सोशल मीडिया केवल संवाद का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि लोकप्रियता का पैमाना बन चुका है. लाइक्स, व्यूज, शेयर और फॉलोअर्स की संख्या कई लोगों के लिए सफलता का मापदंड बन गई है. इस होड़ में कुछ लोग ऐसी सामग्री प्रस्तुत कर रहे हैं जो समाज में नकारात्मकता, असंवेदनशीलता और अपमानजनक प्रवृत्तियों को बढ़ावा देती है. मनोरंजन और हास्य के नाम पर व्यक्तियों, समुदायों और विशेष रूप से महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणियां आम होती जा रही हैं. हाल ही में सामने आई एक घटना इस प्रवृत्ति का उदाहरण है. स्टैंड-अप कॉमेडियन ...

जनाची नाही तरी मनाची तर ठेवा!

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-फहीम खान एकेकाळी समाजात आपले विचार मांडण्यासाठी चौक, बाजारपेठ, सभागृह किंवा कार्यालये हीच प्रमुख व्यासपीठे होती. आजच्या डिजिटल युगात ही जागा सोशल मीडियाने घेतली आहे. फेसबुक, इन्स्टाग्राम, युट्यूब, एक्स आणि इतर माध्यमांमुळे प्रत्येकाला स्वतःचे मत व्यक्त करण्याची संधी मिळाली आहे. ही बाब लोकशाहीच्या दृष्टीने सकारात्मक असली, तरी प्रसिद्धीच्या हव्यासाने या स्वातंत्र्याचा गैरवापरही वाढताना दिसत आहे. आज सोशल मीडियावर व्हायरल होण्यासाठी अक्षरशः स्पर्धा लागली आहे. अधिक व्ह्यूज, लाईक्स आणि फॉलोअर्स मिळवण्यासाठी अनेकजण कोणत्याही थराला जात आहेत. विनोदाच्या नावाखाली व्यक्ती, समाज, धर्म किंवा महिलांबाबत अपमानास्पद वक्तव्ये केली जात आहेत. काही क्षणांच्या प्रसिद्धीसाठी संवेदनशीलता, सभ्यता आणि सामाजिक जबाबदारी यांचा बळी दिला जात आहे. दुर्दैवाची बाब म्हणजे अशा गोष्टींना काहीजण मनोरंजनाचे स्वरूप देतात. अलीकडेच गुरगावमधील एका तरुणाची घटना याच वास्तवाची जाणीव करून देते. स्टँड-अप कॉमेडियन प्रणित मोरेच्या एका कार्यक्रमात 23 वर्षीय हिमांशु जांग्राने एका मुलीबाबत केलेले वक्तव्य सोशल मीडियावर व्हायरल झाले. काह...

टार्गेट पर ‘लाल सलाम 2.0’

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- अर्बन नक्सल नेटवर्क पर खुफिया एजेंसियों की पैनी नजर फहीम खान नागपुर : जंगलों में सक्रिय सशस्त्र नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता मिलने के बाद अब सुरक्षा एजेंसियों और सरकार का फोकस अर्बन नक्सल नेटवर्क पर केंद्रित हो गया है. खुफिया एजेंसियां महानगरों में रहकर माओवादी विचारधारा के प्रचार-प्रसार, सशस्त्र क्रांति और लोकतांत्रिक व्यवस्था को चुनौती देने वाली गतिविधियों से जुड़े तत्वों की जानकारी जुटाने में लगी हैं. सूत्रों के अनुसार, नक्सलवाद के सशस्त्र ढांचे को कमजोर किए जाने के बाद अब उसके वैचारिक और शहरी नेटवर्क पर कार्रवाई की रणनीति बनाई जा रही है. सूत्रों का कहना है कि सरकार ने नक्सली समस्या से मुक्ति के बाद के लिए जो रोडमैप तैयार किया है, उसमें माओवादी इकोसिस्टम, अलगाववादी और विध्वंसक गतिविधियों से जुड़े नेटवर्क की पहचान कर उन पर प्रभावी कार्रवाई को प्रमुख लक्ष्य बनाया गया है. माना जाता है कि ऐसे तत्व विभिन्न संस्थानों और संगठनों के माध्यम से अपनी पैठ बनाने का प्रयास करते हैं. इसी को देखते हुए निगरानी, जांच और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया को और मजबूत किया जा रहा है. नक्सलियों की फंडिं...