विश्वास की उड़ान और नीट परीक्षा की चुनौती

- फहीम खान 

नीट-यूजी परीक्षा केवल एक प्रवेश परीक्षा नहीं है, बल्कि लाखों विद्यार्थियों और उनके परिवारों के सपनों का आधार है. पिछले वर्ष पेपर लीक प्रकरण ने इस परीक्षा की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे. देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए, न्यायालय तक मामला पहुंचा और अंततः पुनर्परीक्षा का निर्णय लेना पड़ा. ऐसे माहौल में 21 जून को होने वाली नीट री-एग्जाम को लेकर सरकार ने जो विशेष सुरक्षा व्यवस्था की है, वह स्वागतयोग्य कदम है.


इस बार प्रश्नपत्रों को भारतीय वायुसेना के सी-17 जैसे विशेष विमान और एमआई-17 हेलीकॉप्टरों के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रीय केंद्रों तक पहुंचाया जा रहा है. वहां से भारतीय डाक विभाग की मदद से उन्हें परीक्षा केंद्रों तक सुरक्षित पहुंचाने की व्यवस्था की गई है. तीन स्तर की सुरक्षा, केंद्रीय बलों की निगरानी, स्थानीय प्रशासन की भागीदारी और हर चरण पर कड़ी मॉनिटरिंग यह दर्शाती है कि सरकार इस बार किसी भी प्रकार की चूक की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहती.


भारतीय वायुसेना और भारतीय डाक विभाग, दोनों ही संस्थाएं दशकों से देशवासियों के भरोसे की प्रतीक रही हैं. वायुसेना ने हर संकट की घड़ी में अपनी क्षमता और प्रतिबद्धता साबित की है. वहीं भारतीय डाक विभाग ने देश के सबसे दूरस्थ क्षेत्रों तक सेवाएं पहुंचाकर विश्वसनीयता का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है. ऐसे में इन दोनों संस्थाओं को परीक्षा प्रक्रिया से जोड़ना केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि छात्रों और अभिभावकों में विश्वास बहाल करने का प्रयास भी है.


हालांकि यह भी सच है कि केवल प्रश्नपत्रों की सुरक्षित ढुलाई से ही समस्या का समाधान नहीं होगा. पिछले वर्षों में सामने आए विवादों ने यह स्पष्ट किया है कि परीक्षा प्रणाली की पूरी श्रृंखला को मजबूत करने की आवश्यकता है. प्रश्नपत्रों की छपाई, भंडारण, परिवहन, परीक्षा केंद्रों का संचालन और परिणाम प्रक्रिया हर स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी. यदि कहीं भी कमजोरी रह गई तो छात्रों का भरोसा फिर से डगमगा सकता है.


सबसे महत्वपूर्ण सवाल राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की विश्वसनीयता का है. लाखों छात्र अपने भविष्य का निर्णय इस संस्था द्वारा आयोजित परीक्षाओं के आधार पर करते हैं. इसलिए केवल सुरक्षा इंतजाम बढ़ाना पर्याप्त नहीं है. एनटीए को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार, तकनीकी निगरानी को मजबूत करने और जवाबदेही तय करने जैसे कदम भी उठाने होंगे. दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और परीक्षा प्रक्रिया में सुधार ही संस्था की साख को पुनर्स्थापित कर सकते हैं.


देश के लाखों छात्र आज केवल एक निष्पक्ष अवसर चाहते हैं. उन्हें यह भरोसा चाहिए कि उनकी मेहनत का मूल्यांकन ईमानदारी से होगा और किसी भी प्रकार की अनियमितता उनके सपनों पर भारी नहीं पड़ेगी. भारतीय वायुसेना और डाक विभाग की भागीदारी ने विश्वास की एक नई उड़ान अवश्य दी है, लेकिन इस विश्वास को स्थायी बनाने की जिम्मेदारी अब पूरे परीक्षा तंत्र, विशेषकर एनटीए, पर है. परीक्षा की सफलता केवल सुरक्षित प्रश्नपत्रों से नहीं, बल्कि निष्पक्ष और पारदर्शी व्यवस्था से तय होगी.


- फहीम खान, सीनियर जर्नलिस्ट, नागपुर 
8483879505 

Fahim Khan

A Journalist now working for Lokmat Media pvt ltd. As a Dy. Chief Sub Editor. Specially deals in Naxal and tribal matter. Work as a Sr. Journalist for more than 10 years. After worked in Gadchiroli, worked 3 years at Amravati. From 2014 working at Nagpur.

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