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- अर्बन नक्सल नेटवर्क पर खुफिया एजेंसियों की पैनी नजर

फहीम खान

नागपुर : जंगलों में सक्रिय सशस्त्र नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता मिलने के बाद अब सुरक्षा एजेंसियों और सरकार का फोकस अर्बन नक्सल नेटवर्क पर केंद्रित हो गया है. खुफिया एजेंसियां महानगरों में रहकर माओवादी विचारधारा के प्रचार-प्रसार, सशस्त्र क्रांति और लोकतांत्रिक व्यवस्था को चुनौती देने वाली गतिविधियों से जुड़े तत्वों की जानकारी जुटाने में लगी हैं. सूत्रों के अनुसार, नक्सलवाद के सशस्त्र ढांचे को कमजोर किए जाने के बाद अब उसके वैचारिक और शहरी नेटवर्क पर कार्रवाई की रणनीति बनाई जा रही है.

सूत्रों का कहना है कि सरकार ने नक्सली समस्या से मुक्ति के बाद के लिए जो रोडमैप तैयार किया है, उसमें माओवादी इकोसिस्टम, अलगाववादी और विध्वंसक गतिविधियों से जुड़े नेटवर्क की पहचान कर उन पर प्रभावी कार्रवाई को प्रमुख लक्ष्य बनाया गया है. माना जाता है कि ऐसे तत्व विभिन्न संस्थानों और संगठनों के माध्यम से अपनी पैठ बनाने का प्रयास करते हैं. इसी को देखते हुए निगरानी, जांच और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया को और मजबूत किया जा रहा है.

नक्सलियों की फंडिंग रोकने के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा विभिन्न मामलों में करोड़ों रुपये की संपत्तियां जब्त की गई हैं. अधिकारियों का मानना है कि इससे शहरी नेटवर्क और सूचना तंत्र को झटका लगा है. वहीं, सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले पूर्व नक्सलियों को आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और आवास जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराने का फायदा हुआ है. 


सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव

पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने युवाओं से अपील की है कि वे सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से किसी भी संगठन, अभियान या गतिविधि से जुड़ने से पहले उसकी पृष्ठभूमि की जानकारी अवश्य लें और किसी भी देशविरोधी या गैरकानूनी गतिविधि का हिस्सा बनने से बचें. अधिकारियों का कहना है कि जागरूकता और सतर्कता ही ऐसे प्रयासों को विफल करने का सबसे प्रभावी माध्यम है.


सोशल मीडिया पर उभर रहे समूहों पर भी नजर

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे कुछ नए समूहों और अभियानों पर भी एजेंसियां नजर बनाए हुए हैं. जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कहीं इन प्लेटफॉर्मों का उपयोग संगठित वैचारिक या विध्वंसक गतिविधियों के लिए तो नहीं किया जा रहा. हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक स्तर पर कोई भी अधिकारी विस्तृत जानकारी साझा नहीं कर रहा है.


- फहीम खान, सीनियर जर्नलिस्ट, नागपुर 
8483879505 

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