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मनपा में महिला नेतृत्व पर प्रतीक से आगे बढ़ने की जिम्मेदारी

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  लाख टके की बात - फहीम खान नागपुर महानगरपालिका की सियासत इस बार सचमुच अलग रंग में नजर आ रही है. महापौर और उपमहापौर के बाद अब स्थायी समिति और विशेष समितियों की कमान भी महिलाओं को सौंप दी गई है. यानी मनपा की पूरी तस्वीर में ‘नारीशक्ति’ का असर साफ दिख रहा है. सोशल मीडिया पर तो अब यह मांग भी उठने लगी है कि शहर का आयुक्त भी किसी महिला आईएएस अधिकारी को बनाया जाए. नागपुर, जिसे देश के तेजी से विकसित होते शहरों में गिना जा रहा है, वहां यह बदलाव प्रतीकात्मक नहीं बल्कि सोच में बदलाव का संकेत माना जाना चाहिए. हमारे शहर की आधी आबादी महिलाएं हैं. वे हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, कारोबार से लेकर प्रशासन तक अपनी भूमिका निभा रही हैं. ऐसे में मनपा की बागडोर महिलाओं को सौंपना यकीनन स्वागत योग्य कदम है. लेकिन सवाल यहीं से शुरू होता है. 8 मार्च को महिला दिवस के आसपास लिए गए ऐसे फैसले कहीं केवल सुर्खियां बटोरने तक सीमित तो नहीं रह जाएंगे? इससे पहले भी शहर की कमान महिलाओं के हाथों में रही है. बावजूद इसके महिलाओं से जुड़ी बुनियादी समस्याएं जस की तस बनी रहीं. सार्वजनिक शौचालयों की कमी, सुरक्षित और स्वच्...

लाख टके की बात : पुराने वीडियो वायरल करने की आखिर जरूरत ही क्या थी?

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– फहीम खान पिछले हफ्ते नागपुर में हुई मूसलधार बारिश ने एक बार फिर से ‘स्मार्ट सिटी’ के दावों को पानी में बहा दिया. बारिश से जलजमाव हुआ, सड़कों पर गाड़ियां डूबी नजर आईं और कुछ इलाकों में तो हालात इतने बिगड़े कि एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें नाव लेकर लोगों को उनके घरों से निकालने पहुंचीं. सवाल यह है कि हर साल यही होता है, तो फिर हर बार की तैयारी अधूरी क्यों होती है? अगर 200 मिमी बारिश में ही शहर बिखर जाए, तो स्मार्ट कहे जाने का क्या औचित्य है? हर साल जिन इलाकों में पानी भरता है, इस बार भी वही हुआ, तो क्या प्रशासन ने कुछ भी नहीं सीखा? टैक्स वसूलने में मनपा कभी पीछे नहीं रहती, लेकिन नागरिकों की सुरक्षा और सुविधा की जिम्मेदारी से हाथ पीछे खींच लेती है. लेकिन इस बार प्रशासन की लापरवाही के साथ एक और चिंता की बात सामने आई, दो साल पुराने वीडियो का वायरल खेल. सोशल मीडिया पर शहर के कुछ तथाकथित 'इंफ्लुएंसर्स' ने 2023 की बाढ़ के वीडियो को 2025 की बारिश बताकर फैलाया. ये वीडियो न सिर्फ भ्रामक थे, बल्कि शहर की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले भी थे. क्या ये सब जानबूझकर हुआ? सिर्फ कुछ ‘लाइक’ और...

ये नागपुर है मेरी जान I आखिर इस शहर को हो क्या गया है?

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रविवार और सोमवार को नागपुर शहर में ऐसी भारी बारिश हुई कि एक बार फिर से नागपुर शहर ‘पानी -पानी’ हो गया. कहने के लिए यह शहर महाराष्ट्र की उपराजधानी का शहर है. लेकिन जरा सी बारिश भी इस शहर को ऐसे परेशान कर देती है कि लोग कहने लगते है कि इससे तो अपना गांव ही भला.  देश के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का एक हिस्सा बन चुका नागपुर महानगर बारिश का कहर ही नहीं झेल पा रहा है. हालांकि कई बार मनपा प्रशासन यह दावा करता है कि मानसून पूर्व नियोजन किए जाने की वजह से अबकी बार शहरवासियों को परेशानी नहीं होगी, और होता बिल्कुल इसके उल्टा है. लोग भी इससे तंग आ चुके है. लेकिन अब करें भी तो क्या करें? हर साल का यह हाल होने की वजह से अब तो लोग मजाक में यह भी बताने लगे है कि अबकी बार बारिश में कहां क्या होगा? मसलन मनीष नगर रोड जलमग्न हो जाएगा, लोहा पुल के नीचे पानी भर जाएगा, नरेंद्र नगर पुल के भी ऐसे ही हालात होंगे.  इस बार की बारिश से सर्वाधिक वर्धा रोड का हिस्सा प्रभावित हुआ. अंतरराष्ट्रीय कहलाने वाला नागपुर विमानतल परिसर मूसलाधार बारिश की वजह से तालाब में तब्दील हो गया. वहीं सोनेगांव पुलिस थाने के परिसर म...