मनपा में महिला नेतृत्व पर प्रतीक से आगे बढ़ने की जिम्मेदारी

 


लाख टके की बात - फहीम खान


नागपुर महानगरपालिका की सियासत इस बार सचमुच अलग रंग में नजर आ रही है. महापौर और उपमहापौर के बाद अब स्थायी समिति और विशेष समितियों की कमान भी महिलाओं को सौंप दी गई है. यानी मनपा की पूरी तस्वीर में ‘नारीशक्ति’ का असर साफ दिख रहा है. सोशल मीडिया पर तो अब यह मांग भी उठने लगी है कि शहर का आयुक्त भी किसी महिला आईएएस अधिकारी को बनाया जाए.

नागपुर, जिसे देश के तेजी से विकसित होते शहरों में गिना जा रहा है, वहां यह बदलाव प्रतीकात्मक नहीं बल्कि सोच में बदलाव का संकेत माना जाना चाहिए. हमारे शहर की आधी आबादी महिलाएं हैं. वे हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, कारोबार से लेकर प्रशासन तक अपनी भूमिका निभा रही हैं. ऐसे में मनपा की बागडोर महिलाओं को सौंपना यकीनन स्वागत योग्य कदम है.

लेकिन सवाल यहीं से शुरू होता है. 8 मार्च को महिला दिवस के आसपास लिए गए ऐसे फैसले कहीं केवल सुर्खियां बटोरने तक सीमित तो नहीं रह जाएंगे? इससे पहले भी शहर की कमान महिलाओं के हाथों में रही है. बावजूद इसके महिलाओं से जुड़ी बुनियादी समस्याएं जस की तस बनी रहीं. सार्वजनिक शौचालयों की कमी, सुरक्षित और स्वच्छ सुविधाओं का अभाव, यह मुद्दा दो दशक से चर्चा में है. अगर आधी आबादी की प्राथमिक समस्या ही वर्षों तक हल न हो पाए तो ‘नारीशक्ति’ की बात कई बार सिर्फ हेडलाइन मैनेजमेंट जैसी लगने लगती है.

आज जरूरत है प्रतीकात्मक फैसलों से आगे बढ़कर ठोस काम करने की. शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाना, बस स्टॉप और सड़कों पर पर्याप्त रोशनी, रात में काम से लौटने वाली महिलाओं और छात्राओं के लिए सुरक्षित माहौल, ये सब मनपा की प्राथमिकता में होना चाहिए. हम सब जानते हैं कि घर की मुखिया अगर समझदार और सक्रिय हो तो घर खुशहाल होता है. अब जब शहर की मुखिया महिला है तो नागपुरवासी भी वैसी ही खुशहाली की उम्मीद कर रहे हैं. लेकिन इसके लिए जरूरी है कि महिला जनप्रतिनिधि मनपा के कामकाज को पूरी गंभीरता से समझें और निर्णय लेने में स्वतंत्र भूमिका निभाएं. पहले कई बार यह आरोप लगाया जाता रहा है कि महिला पार्षदों के पीछे ‘पतिराज’ सक्रिय रहते हैं. अब नागपुर शहर में यह धारणा भी बदलनी होगी.

अब नजरें भाजपा की महिला टीम पर टिकी हैं. यह समय परीक्षा का है. नागपुर की जनता देखना चाहती है कि यह फैसला केवल प्रतीक है या प्रशासनिक बदलाव की नई शुरुआत. ‘लाख टके की बात’ यही है कि अगर भाजपा नेतृत्व ने नागपुर शहर में अपनी ‘नारीशक्ति’ को जिम्मेदारी दी है तो उसे फैसले लेने और उन फैसलों पर अमल करने की असली ताकत भी देनी होगी. तभी यह बदलाव इतिहास बनेगा, वरना यह एक और हेडलाइन बनकर रह जाएगा.


- फहीम खान, सीनियर जर्नलिस्ट, नागपुर 
8483879505 

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