नया फूड ट्रेंड: अब रेस्तरां नहीं, अनुभव बन रहा है खाना



- युवाओं को खूब लुभा रहा है एक्सपीरिएंशियल डाइनिंग

फहीम खान 

नागपुर : शहरों में खाने का तरीका तेजी से बदल रहा है. अब लोग सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि एक यादगार अनुभव के लिए खाने की मेज तक पहुंच रहे हैं. इसी बदलाव के साथ एक नया फूड ट्रेंड उभर कर सामने आया है, जिसे एक्सपीरिएंशियल डाइनिंग कहा जा रहा है. देश के महानगरों में यह ट्रेंड तेजी से फैलने लगा है. नागपुर भी इससे अछूता नहीं रहा. नागपुर के अवनी और अमित ने राजस्थानी दाल -बाटी के पारंपरीक मेन्यू को लेकर सपर क्लब शुरू कर दिया है तो वहीं नागपुर के ही रहने वाले अंकिता और अमन लंदन में सपर क्लब के माध्यम से नागपुर की सांबर वड़ी सर्व कर रहे है. छुट्टियां मनाने के लिए यह दंपति नागपुर आने वाला है और इस दौरान एक दिन के लिए नागपुर शहर में लंदन का मेन्यू लेकर एक एक्सपीरिएंशियल डाइनिंग इवेंट रखा गया है. 


इस ट्रेंड में खाना किसी होटल या रेस्तरां की चारदीवारी तक सीमित नहीं है. लोग अपने घरों में ‘सपर क्लब’ चला रहे हैं, शेफ अपने खास मेन्यू के साथ सीमित मेहमानों को आमंत्रित कर रहे हैं, कहीं फार्म में ताजा फसलों के बीच डाइनिंग हो रही है, तो कहीं पारंपरिक व्यंजनों के साथ उनकी कहानी भी परोसी जा रही है. यहां मेहमान सिर्फ ग्राहक नहीं, बल्कि अनुभव का हिस्सा बनते हैं.


खास बात यह है कि इस ट्रेंड में घर का बना खाना, क्षेत्रीय व्यंजन और पारंपरिक रेसिपी फिर से चर्चा में हैं. कई महिलाएं अपने घरेलू किचन से ‘सपर क्लब’ शुरू कर रही हैं और अपनी संस्कृति, परंपरा और स्वाद को लोगों तक पहुंचा रही हैं. इससे न सिर्फ उन्हें पहचान मिल रही है, बल्कि स्थानीय खानपान को भी नया मंच मिल रहा है.


कोविड के बाद लोगों की सोच में बड़ा बदलाव आया है. भीड़-भाड़ वाले रेस्तरां की जगह अब लोग सीमित और निजी डाइनिंग को तरजीह दे रहे हैं. जहां शोर कम हो, बातचीत ज्यादा हो और खाना सोच-समझकर तैयार किया गया हो. यही वजह है कि होम टेबल, पॉप-अप डाइनिंग और शेफ टेबल जैसे कॉन्सेप्ट तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं.



‘सोंची’ नामक एक सांस्कृतिक और समुदाय आधारित प्लेटफॉर्म चलाने वाली फूड एक्सपर्ट  माला जोंवर मानती है कि यह ट्रेंड सिर्फ खाने तक सीमित नहीं है. यह जुड़ाव, विश्वास और धीमी जिंदगी की ओर लौटने का संकेत है. लोग जानना चाहते हैं कि उनकी प्लेट में क्या है, किसने बनाया है और उसके पीछे की कहानी क्या है. कुल मिलाकर, नया फूड ट्रेंड यह बता रहा है कि आने वाले समय में खाना सिर्फ स्वाद का मामला नहीं रहेगा. यह यादों, रिश्तों और अनुभवों का हिस्सा बनेगा. और शायद इसी वजह से लोग कह रहे हैं... अब खाना नहीं, अनुभव परोसा जा रहा है.


‘सोंची’ क्या है

सोंची एक सांस्कृतिक और समुदाय आधारित प्लेटफॉर्म है, जो अनुभव आधारित भोजन यानी एक्सपीरिएंशियल डाइनिंग को बढ़ावा देता है. अगस्त 2023 में इंदौर की रहने वाली (अभी नागपुरवासी)  माला जोंवर द्वारा शुरू की गई सोंची का उद्देश्य रेस्तरां से अलग, घरों और खास जगहों पर होने वाले निजी डाइनिंग अनुभवों को लोगों तक पहुंचाना है. इसमें सपर क्लब, होम टेबल, शेफ टेबल, फूड पॉप-अप और फार्म-टू-टेबल डाइनिंग शामिल हैं. माला का कहना है कि सोंची असल में ‘सोन चिड़िया’ का शॉर्ट फार्म है, जो शब्द कभी भारत  के लिए इस्तेमाल किया जाता था. सोंची खाने को सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि कहानी, संस्कृति और जुड़ाव के रूप में देख रहा है. यह प्लेटफॉर्म होस्ट्स और मेहमानों को जोड़कर भोजन को यादगार अनुभव बनाने में जुटा है.


सांभर वडी से दोस्त बनें 


वीएनआईटी से पढ़ी तथा आईआईटी गुवाहाटी से डिग्री प्राप्त आईटी प्रोफेशनल अंकिता का कहना है कि नागपुर छोड़ने के बाद वह जब बेंगलुरु गई तो वहां पर उन्होंने यह ट्रेडीशन देखा. लेकिन व्यस्तताओं के चलते इच्छा होकर भी कुछ कर नहीं सकी. जब वे उनके पति के साथ लंदन गई तब उन्हें वहां पर दोस्त बनाने की जरूरत महसूस हुई, तो उन्होंने वहां सपर क्लब शुरू किया. इस माध्यम से वे नागपुर की सांभर वडी लंदन के लोगों को परोसने लगी. सांभर वडी ही क्यों? ऐसा पूछने पर अंकिता कहती है कि जब वह नागपुर में रहती थी तब हाई कोर्ट के पास जाकर अक्सर सांभर वडी खाती थी. इसीलिए उसने सांभर वडी  परोसने का निर्णय लिया था. 12 फरवरी को अंकिता और उनके पति द्वारा नागपुर में लंदन का मेनू पेश किया जाने वाला है इस पर वह कहती हैं कि वह चाहती है कि उसने वहां जो सीखा है वह यहां के फूड लवर्स को जरूर टेस्ट करवाए.


- फहीम खान, सीनियर जर्नलिस्ट, नागपुर 
8483879505 

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