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Showing posts from March, 2026

बार-बार विस्फोट : हादसे के बाद जागती है सुरक्षा, फिर क्यों भूल जाते हैं सब?

  लाख टके की बात - फहीम खान नागपुर जिले के कलमेश्वर क्षेत्र में रविवार को एसबीएल कंपनी की विस्फोटक इकाई में हुए भीषण धमाके में 17 मजदूरों की मौत ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. धमाका इतना तेज था कि आसपास के गांवों तक उसकी गूंज सुनाई दी. कई मजदूरों की मौके पर ही जान चली गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए. घटना के बाद प्रशासन और बचाव दल मौके पर पहुंचे, लेकिन यह हादसा नागपुर के औद्योगिक इतिहास में एक और दर्दनाक अध्याय जोड़ गया. दरअसल, नागपुर जिले में विस्फोटक और रसायन उद्योगों में हादसों की यह पहली घटना नहीं है. पिछले कुछ वर्षों में ऐसे कई हादसे सामने आ चुके हैं. सबसे बड़ा हादसा दिसंबर 2023 में बाजारगांव स्थित सोलर इंडस्ट्रीज की फैक्ट्री में हुआ था, जहां विस्फोट में 9 मजदूरों की मौत हो गई थी और कई कर्मचारी घायल हुए थे. इसके पहले भी सोलर इंडस्ट्रीज की एक अन्य इकाई में विस्फोट की घटना सामने आई थी, जिसमें कामगार झुलस गए थे. इसके अलावा धमना गांव की चामुंडी एक्सप्लोसिव्स कंपनी में हुए धमाके में भी 6 मजदूरों की जान चली गई थी. कलमेश्वर क्षेत्र में पटाखा निर्मा...

मनपा में महिला नेतृत्व पर प्रतीक से आगे बढ़ने की जिम्मेदारी

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  लाख टके की बात - फहीम खान नागपुर महानगरपालिका की सियासत इस बार सचमुच अलग रंग में नजर आ रही है. महापौर और उपमहापौर के बाद अब स्थायी समिति और विशेष समितियों की कमान भी महिलाओं को सौंप दी गई है. यानी मनपा की पूरी तस्वीर में ‘नारीशक्ति’ का असर साफ दिख रहा है. सोशल मीडिया पर तो अब यह मांग भी उठने लगी है कि शहर का आयुक्त भी किसी महिला आईएएस अधिकारी को बनाया जाए. नागपुर, जिसे देश के तेजी से विकसित होते शहरों में गिना जा रहा है, वहां यह बदलाव प्रतीकात्मक नहीं बल्कि सोच में बदलाव का संकेत माना जाना चाहिए. हमारे शहर की आधी आबादी महिलाएं हैं. वे हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, कारोबार से लेकर प्रशासन तक अपनी भूमिका निभा रही हैं. ऐसे में मनपा की बागडोर महिलाओं को सौंपना यकीनन स्वागत योग्य कदम है. लेकिन सवाल यहीं से शुरू होता है. 8 मार्च को महिला दिवस के आसपास लिए गए ऐसे फैसले कहीं केवल सुर्खियां बटोरने तक सीमित तो नहीं रह जाएंगे? इससे पहले भी शहर की कमान महिलाओं के हाथों में रही है. बावजूद इसके महिलाओं से जुड़ी बुनियादी समस्याएं जस की तस बनी रहीं. सार्वजनिक शौचालयों की कमी, सुरक्षित और स्वच्...