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एसबीएल विस्फोट: सवालों के साए में न्याय की तलाश

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- फहीम खान 1 मार्च की सुबह 6:45 बजे नागपुर जिले की काटोल तहसील का छोटा सा गांव राउलगांव एक जोरदार धमाके से दहल उठा. यह धमाका इतना भीषण था कि उसने सिर्फ एक फैक्ट्री को नहीं, बल्कि 26 परिवारों की जिंदगी को हमेशा के लिए बदल दिया. एसबीएल एनर्जी लिमिटेड के डिटोनेटर यूनिट में हुआ यह विस्फोट अब महज हादसा नहीं, बल्कि एक गहरा जख्म बन चुका है. समय बीत रहा है, लेकिन दर्द और सवाल दोनों कम होने का नाम नहीं ले रहे. सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है — आखिर कंपनी के मालिक कहां हैं? सूत्रों के मुताबिक चेयरमैन संजय चौधरी और सीईओ आलोक चौधरी विस्फोट वाले दिन रायपुर से नागपुर के लिए निकले थे. पुलिस को उनकी मूवमेंट की जानकारी भी थी, लेकिन जैसे ही मामला दर्ज हुआ, दोनों के मोबाइल बंद हो गए. इसके बाद से उनका कोई सुराग नहीं मिला. न लोकेशन, न संपर्क, जैसे अचानक दोनों गायब हो गए हों. जांच एजेंसियों की शुरुआती रिपोर्ट ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है. जांच में सामने आया कि फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी की गई थी. केमिकल स्टोरेज में गड़बड़ी थी, फायर सेफ्टी सिस्टम अधूरा था और इमरजेंसी रिस्पॉन्स लगभग नाम मात...

क्यों खाली हाथ लौट रही है पुलिस?

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एसबीएल विस्फोट: डेढ़ महीने बाद भी न्याय दूर - फहीम खान डेढ़ महीना बीत चुका है. धूल बैठ गई है, फैक्ट्री की जली हुई दीवारें अब खामोश हैं, लेकिन 26 मजदूरों की मौत का सवाल अब भी हवा में तैर रहा है—आखिर न्याय कब मिलेगा? एसबीएल एनर्जी लिमिटेड में हुए भीषण विस्फोट के बाद से पुलिस लगातार दबिश दे रही है. रायपुर, नागपुर और महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ बॉर्डर पर तीन टीमें सक्रिय हैं. हर बार उम्मीद के साथ छापेमारी होती है, लेकिन नतीजा वही, खाली हाथ वापसी. कंपनी के मालिक संजय चौधरी और सीईओ आलोक चौधरी अब भी गिरफ्त से बाहर हैं. उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी हो चुका है, गैर-जमानती वारंट की प्रक्रिया भी चल रही है. पुलिस अब उन्हें “प्रोक्त अपराधी” घोषित करने की तैयारी में है, ताकि संपत्तियों को कुर्क किया जा सके. जांच में यह आशंका भी है कि दोनों देश छोड़ने की कोशिश में हैं, या शायद जा चुके हैं. पहले भी शहर के एक आरटीआई कार्यकर्ता लुकआउट नोटिस के बावजूद दुबई भागने में सफल रहा था. इसी वजह से इस बार बॉर्डर एजेंसियों को अलर्ट किया गया है और पुराने ट्रैवल रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं. सबसे बड़ा सवाल यही है, जब 11 लोग गि...