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Showing posts from February, 2026

वाकई मुश्किल नहीं है, इंसान बने रहना?

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- फहीम खान  मेरे बचपन की कुछ यादें आज भी ताजा हैं. उन यादों में एक दूरदर्शन का विज्ञापन भी शामिल है. वह कोई चकाचौंध वाला विज्ञापन नहीं था, न ही उसमें बड़े सितारे थे. लेकिन उसमें एक सवाल था, जो सीधे दिल में उतर जाता था - ‘शैतान बनना आसान है, पर क्या इंसान बने रहना इतना मुश्किल है?’ तब मैं छोटा था. उस वाक्य का अर्थ पूरी तरह समझ नहीं पाता था, लेकिन वह मन में कहीं बैठ गया. जैसे कोई बीज चुपचाप मिट्टी के भीतर दबा हो और सही वक्त पर अंकुरित होने का इंतजार कर रहा हो. केरल की एक खबर ने उसी बीज को फिर से जगा दिया. यह कहानी है 10 महीने की एक मासूम बच्ची- एलिन शेरिन अब्राहम की. इतनी सी उम्र, जब दुनिया का मतलब सिर्फ मां की गोद, पिता की उंगली और खिलौनों की मुस्कान तक सीमित होता है. लेकिन नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था. एक सड़क हादसे ने उस नन्ही जिंदगी को हमसे छीन लिया. डॉक्टरों ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया. यह वह क्षण होता है जब समय ठहर जाता है. जब सांसें चल रही होती हैं, पर उम्मीद मर चुकी होती है. जब मशीनें शरीर को जिंदा रखती हैं, लेकिन दिल जानता है कि अब वापसी नहीं होगी. किसी भी मां-बाप के ...

मोहब्बत… जो खत्म नहीं होती

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वैलेंटाइन डे पर फहीम खान का ब्लॉग कई बार हम सुनते हैं- “अगर ये मोहब्बत शादी तक नहीं पहुंची तो सब बेकार गया.” और जब रिश्ता टूट जाता है तो वही लोग एक-दूसरे को बेवफा कहने लगते हैं. जैसे प्यार कोई सौदा था, जो पूरा नहीं हुआ तो घाटा हो गया. लेकिन सच पूछिए तो जिस दिन आपने किसी को बेवफा कहा, उसके एक दिन पहले तक वही शख्स आपकी धड़कनों में बसा हुआ था. सुबह की पहली याद, रात की आखिरी दुआ वही तो था. फिर अचानक क्या बदल गया? क्या वो इंसान बदल गया, या हमारे अंदर की उम्मीदें? मोहब्बत को हम अक्सर मंज़िल से जोड़ देते हैं, जबकि वो तो एक सफर है. हर सफर शादी तक पहुंचे, ये जरूरी नहीं. कुछ रिश्ते हमें सिर्फ बेहतर इंसान बनाने के लिए ही जिंदगी में आते हैं. याद है वो गुलाब? जो उसने हंसते हुए आपको दिया था. आपने उसकी पंखुड़ियां किताब के पन्नों में संभालकर रख दीं. सालों बाद जब वही किताब खुलती है और सूखी हुई पंखुड़ियां उंगलियों से छूती हैं, तो एक हल्की सी खुशबू फिर से दिल में उतर जाती है. वो शख्स सामने नहीं होता, लेकिन एहसास जिंदा हो जाता है. महान उर्दू शायर मिर्ज़ा ग़ालिब ने खूब कहा है- “इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये...

नया फूड ट्रेंड: अब रेस्तरां नहीं, अनुभव बन रहा है खाना

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- युवाओं को खूब लुभा रहा है एक्सपीरिएंशियल डाइनिंग फहीम खान  नागपुर : शहरों में खाने का तरीका तेजी से बदल रहा है. अब लोग सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि एक यादगार अनुभव के लिए खाने की मेज तक पहुंच रहे हैं. इसी बदलाव के साथ एक नया फूड ट्रेंड उभर कर सामने आया है, जिसे एक्सपीरिएंशियल डाइनिंग कहा जा रहा है. देश के महानगरों में यह ट्रेंड तेजी से फैलने लगा है. नागपुर भी इससे अछूता नहीं रहा. नागपुर के अवनी और अमित ने राजस्थानी दाल -बाटी के पारंपरीक मेन्यू को लेकर सपर क्लब शुरू कर दिया है तो वहीं नागपुर के ही रहने वाले अंकिता और अमन लंदन में सपर क्लब के माध्यम से नागपुर की सांबर वड़ी सर्व कर रहे है. छुट्टियां मनाने के लिए यह दंपति नागपुर आने वाला है और इस दौरान एक दिन के लिए नागपुर शहर में लंदन का मेन्यू लेकर एक एक्सपीरिएंशियल डाइनिंग इवेंट रखा गया है.  इस ट्रेंड में खाना किसी होटल या रेस्तरां की चारदीवारी तक सीमित नहीं है. लोग अपने घरों में ‘सपर क्लब’ चला रहे हैं, शेफ अपने खास मेन्यू के साथ सीमित मेहमानों को आमंत्रित कर रहे हैं, कहीं फार्म में ताजा फसलों के बीच डाइनिंग हो रही है, ...