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हौसले बुलंद हो तो कोई बात कठिन नहीं

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- वेकोलि की अंडरग्राउंड माइन में बेझिझक पहुंचती हैं ये जाबांज अधिकारी by फहीम खान, जर्नलिस्ट, नागपुर.  समाज में कई बार महिलाओं के लिए सीमाएं तय कर दी जाती हैं। कुछ कार्यक्षेत्रों को पारंपरिक रूप से पुरुषों के लिए ही उपयुक्त माना जाता रहा है, लेकिन जब हौसले बुलंद हों और लगन मजबूत हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। वेकोलि (वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) की अंडरग्राउंड कोयला खदानों में कार्यरत महिला अधिकारी अखिला सहिती अंकम और प्रज्ञा वैष्णव ने इसी सोच को चुनौती दी है और यह साबित किया है कि संकल्प और समर्पण से कोई भी बाधा पार की जा सकती है। महिलाओं के लिए माइनिंग में करियर: कठिनाइयों का सफर वर्ष 2019 तक खदानों में महिलाओं की भागीदारी लगभग नगण्य थी। कोयला खदानों को पुरुषों के लिए सुरक्षित माना जाता था और महिलाओं के इस क्षेत्र में काम करने को लेकर समाज की सोच नकारात्मक थी। लेकिन चंद्रपुर की चंद्राणी प्रसाद वर्मा ने इस धारा को मोड़ा। उन्होंने लंबी न्यायिक लड़ाई लड़कर महिलाओं के लिए इस क्षेत्र के दरवाजे खोले। आज वेकोलि के नागपुर और बल्लारपुर एरिया में कुल पांच महिला अधिकारी कार्यरत हैं, ...

खत्म हुआ कांता ऊर्फ कांतक्का का खौफ

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 18 लाख के इनामिया नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण गड़चिरोली जिले में पुलिस द्वारा चलाए जा रहे आत्मसमर्पण योजना से प्रभावित होकर दो कुख्यात नक्सलियों ने गुरुवार को आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें से एक नक्सली डीवीसीएम सदस्य के रूप में सक्रिय था, जबकि दूसरा भामरागड़ दलम का सदस्य था। इन दोनों पर कुल 18 लाख रुपये का इनाम घोषित था। कांता ऊर्फ कांतक्का और सुरेश ऊर्फ वारलु का आत्मसमर्पण पुलिस और सरकार की बड़ी सफलता है। इससे नक्सली संगठनों की शक्ति कमजोर होगी और अन्य नक्सलियों को भी आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित किया जा सकेगा। सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति से नक्सली हिंसा में कमी आने की उम्मीद है। कौन हैं आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली? कांता ऊर्फ कांतक्का ऊर्फ मांडी गालु पल्लो (56) - डीवीसीएम सप्लाय टीम की सदस्य, निवासी गुंडजूर, भामरागड़ तहसील। इस पर 16 लाख रुपये का इनाम घोषित था। सुरेश ऊर्फ वारलु ईरपा मज्जी (30) - भामरागड़ दलम सदस्य, निवासी मिलदापल्ली, भामरागड़ तहसील। इस पर 2 लाख रुपये का इनाम घोषित था। सरकार की आत्मसमर्पण योजना का प्रभाव भारत सरकार ने वर्ष 2005 में आत्मसमर्पण योजना की शुरुआत ...

एआई तकनीक: वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाएं

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by फहीम खान, जर्नलिस्ट, नागपुर.  आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की तकनीक ने हाल के वर्षों में बहुत प्रगति की है। आज, एआई हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। एआई के विभिन्न उपयोग जैसे कि वॉइस असिस्टेंट (जैसे कि सिरी और एलेक्सा), स्पैम फिल्टरिंग, पर्सनलाइज्ड कंटेंट रिकमेंडेशन, स्वचालित ड्राइविंग, और स्वास्थ्य देखभाल में बीमारी का निदान आदि ने इसे हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बना दिया है। एआई मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग जैसे तकनीकों के माध्यम से लगातार सीख और विकसित हो रहा है, जिससे यह और भी स्मार्ट और उपयोगी होता जा रहा है। भविष्य में एआई की संभावनाएँ भविष्य में, एआई के कारगर साबित होने की संभावनाएँ अनगिनत हैं। चिकित्सा क्षेत्र में, एआई का उपयोग कैंसर जैसे गंभीर रोगों का प्रारंभिक चरण में पता लगाने और उपचार करने के लिए किया जा सकता है। शिक्षा में, यह छात्रों के लिए पर्सनलाइज्ड लर्निंग अनुभव प्रदान कर सकता है। एआई का उपयोग स्मार्ट सिटी और स्मार्ट घरों को विकसित करने के लिए भी किया जा सकता है, जो ऊर्जा बचाने और सुरक्षा में सुधार करने में मदद करेंगे। व्यवसायों के लि...

क्या इंसान बने रहना इतना मुश्किल हो गया है?

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- मासूम बच्चियों तक को बलात्कार का बनाया जा रहा है शिकार by फहीम खान, जर्नलिस्ट, नागपुर.  आज की दुनिया में जिस तेजी से महिला अत्याचार की घटनाएं बढ़ रही हैं, वह हमें एक गंभीर और चिंताजनक स्थिति की ओर इशारा करती हैं। चाहे वो सड़क हो, घर हो, या कार्यस्थल, महिलाओं और मासूम बच्चियों के साथ हो रहे अत्याचार और हिंसा की घटनाएं दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं। मासूम बच्चियों तक को बलात्कार का शिकार बनाया जा रहा है, जो समाज के नैतिक पतन का जीता-जागता उदाहरण है। यह सवाल उठता है कि हमारे समाज में किस तरह की मानसिकता विकसित हो रही है, जहां दया, करुणा, और मानवीयता की जगह क्रूरता, हिंसा और दरिंदगी ने ले ली है? शैतान बनना हमेशा आसान रहा है, क्योंकि उसमें संवेदनाओं की जगह स्वार्थ और हिंसा की प्रधानता होती है। लेकिन इंसान बने रहना, संवेदनशील और न्यायप्रिय बने रहना, क्या आज के दौर में इतना मुश्किल हो गया है? समाज का यह अंधकारमय पक्ष हमारे सभ्य समाज होने पर सवाल खड़े करता है। क्या हमारा समाज अब इतना संवेदनहीन हो गया है कि मासूमों की चीखें भी हमें झकझोर नहीं पातीं? महिला अत्याचार की घटनाएं सिर्फ अपराध नह...

लोकसभा चुनावों में भारतीय वायुसेना ने निभाई अहम भूमिका

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- वायुसेना के विमानों ने 1000 घंटे से अधिक की उड़ान भरी  - चुनाव प्रक्रिया में कंधे से कंधा मिलाकर काम करते रहे वायुसैनिक  भारतीय वायु सेना के परिवहन और हेलीकॉप्टर बेड़े युद्ध और शांतिकाल में अक्सर किसी न किसी कार्य में जुटे हुए नजर आते हैं. वायु रखरखाव, घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय अभ्यासों के दौरान लड़ाकू सैनिकों की एयरलिफ्ट द्वारा हमारे सैनिकों के रखरखाव की शांतिकालीन भूमिका के अलावा, राष्ट्र निर्माण की दिशा में अनेक कार्य भी वायुसेना के माध्यम से किए जाते हैं, हम सभी इससे भलीभांति परिचित है.  लेकिन यह बात भी उतनी ही सच है कि भारतीय वायुसेना विशेष रूप से नागरिक सहायता में सबसे आगे रही है. हाल के आम चुनाव-2024 के दौरान, पिछले कुछ महीनों में मीडियम लिफ्ट हेलीकॉप्टरों (एमआई-17 वैरिएंट), हल्के उपयोगी हेलीकॉप्टरों (चेतक) और स्वदेशी रूप से निर्मित एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टरों (एएलएच) ध्रुव द्वारा पर्याप्त उड़ान कार्य किए गए हैं. चुनाव प्रक्रिया के दौरान वायुसेना बेडे के यह हवाईयान बेहद मददगार साबित हुए है.  ईवीएम की एयरलिफ्टिंग भारतीय वायुसेना इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम...

सिंगापुर में पैदल चलने वालों का होता है इतना सम्मान, दिल जीत लिया इस खासियत ने

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by फहीम खान, जर्नलिस्ट, नागपुर.  अपने अनुशासन और सुचारू यातायात व्यवस्था के लिए दुनियाभर में जाना जाने वाला सिंगापुर एक ओर बात के लिए विख्यात है. सिंगापुर की सड़कों को पार करते समय पैदल चलने वालों को इतना ज्यादा सम्मान दिया जाता है कि उनके एक इशारे पर वाहन तत्काल रूक जाते है. जी हां, सिंगापुर के चौराहों पर कहीं पर भी आपको कोई यातायात पुलिस कर्मी नजर नहीं आता है. लेकिन ऑटोमैटिक सिग्नल सिस्टम की वजह से यातायात सुचारू होता रहता है.  हाल में लोकमत मीडिया समूह की ओर से सिंगापुर में लोकमत इकॉनॉमिकल कंवेंशन का आयोजन किया गया था. इस उपलक्ष्य में सिंगापुर कुछ दिन गुजारने मिले. इस दौरान सिंगापुर की इस खासियत को करीब से देखने और समझने मिला. सिंगापुर की यातायात व्यवस्था ने मुझे भारत के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को और बेहतर तरीके से अंमल में लाने की आईडिया दे दी. असल में इस तरह का ट्रैफिक सिस्टम हर उस महानगर में होना जरूरी है जिसे हम ‘स्मार्ट सिटी’ कहते है. स्मार्ट सिटी में स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम का होना वहां के नागरिकों के प्रति सम्मान के तौर पर देखा जा सकता है.  सिंगापुर में सभी सिग्नल...

आता स्टेटस पुरताच उरला गुलाब...

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कधी प्रेम दिनाला माझ्या बागेतील तो गुलाब  फुलायचा फक्त तुझ्यासाठी  सकाळच्या सोनेरी सूर्यकिरणांमध्ये न्हाहून ताजा होताच पोहोचायचा झाडावरून माझ्या बॅगेत कॉलेजात आल्या -आल्याच तो गुलाब तुला भेटायला आतुर असायचा भेट व्हायची तुझी -त्याची तेव्हा तो हसायचा मग थेट तुझ्या केसांमध्येच जावून बसायचा आता ही प्रेम दिनी माझ्या बागेत माझा गुलाब तसाच फुलतो मात्र तो तुझ्या विना तसाच झाडावर सुकुन जातो... त्याचे मोबाईल मध्ये काढलेले फोटो तेव्हढे  माझ्या मोबाइलच्या स्टेटस मध्ये खुलून दिसतात... ते ही फक्त तुझ्याच साठी... - by फहीम खान, जर्नलिस्ट, नागपुर.  @फहीम खान, जर्नलिस्ट, नागपुर.  fahim234162@gmail.com Twitter- @FaheemLokmat Facebook- https://www.facebook.com/fahimkhan7786 Instagram- https://www.instagram.com/fahimkhan_gad/?hl=en