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नक्सलियों के खिलाफ पुलिस के काम आया ‘जनजागरण’ का हथियार

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 by फहीम खान, जर्नलिस्ट, नागपुर.  1980 से महाराष्ट्र के गढ़चिरोली जिले में नक्सलियों ने कदम रखे और अगले दो दशक में नक्सलियों की हिंसा और उत्पात का सीधा टार्गेट ही पुलिस दल बनता रहा. एक के बाद एक, इतनी बड़ी वारदातों को नक्सलियों ने अंजाम दिया कि एक ही दशक में गढ़चिरोली पुलिस दल ने अपने सैकड़ों जांबाजों को खो दिया. लेकिन बावजूद इसके गढ़चिरोली पुलिस ने जो ‘जनजागरण अभियानों’ का सिलसिला जारी रखा, वहीं नक्सलियों के खात्मे के लिए सबसे प्रभावी हथियार साबित हुआ.  गढ़चिरोली में ‘जनजागरण अभियानों’ का ये दौर वह था जब नक्सलियों के खिलाफ शस्त्रों के साथ ही गढ़चिरोली पुलिस सोशल मुद्दों को लेकर भी लड़ती हुई दिखाई दी. इन ‘जनजागरण अभियानों’ के माध्यम से सुदूर इलाकों के आदिवासी और ग्रामीणों को पहली बार प्रशासन और सरकार का दीदार हुआ. सरकारी योजनाएं पता चली और उन्हें यह विश्वास हुआ कि ‘सिस्टम’ उतना खराब नहीं है, जैसा उन्हें नक्सलियों द्वारा बताया जाता रहा है. उन्होंने इसी दौरान पहली बार जिलाधिकारी, जिला परिषद के सीईओ जैसे बड़े अधिकारियों को देखा, उनके मिले और अपनी बात भी रख सके. यह ऐसा मौका थ...

उमंग-भारतीय सेना और स्थानीय अधिकारियों के बीच एक रणनीतिक पुल

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 उमंग-भारतीय सेना और स्थानीय अधिकारियों के बीच एक रणनीतिक पुल - लोकमत समाचार की उमंग के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल एस. के. विद्यार्थी से विशेष बातचीत फहीम खान नागपुर : जब कोई नागपुर के सीताबर्डी किला क्षेत्र या कस्तूरचंद पार्क के सामने से गुजरता है, तो उसे एक रक्षा प्रतिष्ठान दिखाई देता है, जिस पर उत्तर महाराष्ट्र और गुजरात (उमंग) उपक्षेत्र लिखा हुआ है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यहां तैनात सेना के जवानों की क्या भूमिका है? सब एरिया के कामकाज को समझने के लिए लोकमत समाचार की टीम ने उमंग सब एरिया का हाल में दौरा किया और उत्तर महाराष्ट्र और गुजरात सब एरिया (उमंग), नागपुर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल एस. के. विद्यार्थी, एवीएसएम, एसएम के साथ अनौपचारिक बातचीत की. उपक्षेत्र की भूमिका और जिम्मेदारियों का परिचय देते हुए मेजर जनरल विद्यार्थी ने कहा कि यह उपक्षेत्र, स्थानीय अधिकारियों और भारतीय सेना के बीच एक पुल की तरह है. भारत का भौगोलिक केंद्र नागपुर में होने के कारण इसकी गुजरात राज्य और उत्तर महाराष्ट्र के क्षेत्र की देखभाल करने में महत्वपूर्ण भूमिका है. चर्चा को आगे बढ़ाते हुए...

कौन रोकेगा, ये दक्षिण गढ़चिरोली का "लाल सलाम" ?

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सड़क से लेकर मकान, वाहनों तक नजर आ रही है लाल मिट्टी की धूल की परत, तेजी से पैर पसार रहे इस ‘लाल सलाम’ पर आखिर कोई बोलता क्यों नहीं?  by फहीम खान, जर्नलिस्ट, नागपुर.  एक दौर था जब महाराष्ट्र के सबसे पिछड़े जिले में गढ़चिरोली जिला शुमार होता था. हालात ऐसे बदतर हो गए थे कि कुपोषन भी चरम पर पहुंच गया था. मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च न्यायालय ने गढ़चिरोली के जिलाधिकारी को फटकार लगाई और उन्हें आदेश दिए कि वे जिले के सुदूर इलाकों में भी जाया करें. यही नहीं महाराष्ट्र के राज्यपाल खुद भामरागढ़ जैसी सुदूर तहसील में पहुंचे और उन्होंने वहां पर प्रशासनीक अधिकारियों की बैठक ली. इसके बाद राज्य के मंत्रियों को राज्यपाल ने आदेश दिए कि वे भी सुदूर इलाकों में पहुंचकर सरकारी योजनाओं को जन -जन तक पहुंचाने के प्रयास करें. इसका दूरगामी परिणाम यह हुआ कि कुछ वर्षों में ही गढ़चिरोली जिले से कुपोषण की समस्या हल हो गई.  लेकिन कुपोषण के बाद भी इस जिले की समस्याएं कम होने का नाम नहीं ले रही थी. इसी दौरान नक्सलवाद तेजी से फैला. हालात बद से बदतर होने लगे. जिला पुलिस की मदद के लिए एसआरपीएफ की टुकड...

देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान, कितना बदल गया इंसान...

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फिर एक बार मुझे वह दूरदर्शनवाला जमाना याद आने लगा है. फिर एक बार जेहन में वहीं दूरदर्शन का विज्ञापन चलने लगा है, जो कहता था- ‘शैतान बनना आसान है, लेकिन क्या इंसान बने रहना इतना मुश्किल है?’. इस बार नागपुर शहर में घटीे दो घटनाएं इसके पीछे की मुख्य वजह बनी है. पहला मामला शहर के अथर्व नगरी परिसर का है जहां के निवासी अरमान खान के निवास में एक नाबालिग बंधक बालिका चार साल से नारकीय जीवन बीता रही थी. और अरमान, उसकी पत्नी हीना और साला अजहर उस बालिका को कहते थे कि, ‘तुझे खरीद कर लाए हैं तो मार भी सकते हैं.’ दूसरा मामला है वड़धामना इलाके में एक 4 वर्षीय बालक को क्रूरतापूर्वक सिगरेट के चटके लगाकर अमानवीय यातना देने का. बालक की मां के साथ आरोपी संकेत रमेश उत्तरवार ‘लिव इन रिलेशन’में रहता था.  हुड़केश्वर की इस दस साल की बालिका को बंधक बनाकर यौन शोषण किए जाने के प्रकरण में गिरफ्तार प्रापर्टी डीलर अरमान खान को हुड़केश्वर थाने में वीआईपी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही थी. यह बात तो और भी चौंकाने वाली है. मतलब अरमान, उसकी पत्नी और साला जितना बेरहम था उतनी ही शैतानी हरकत पुलिस के अधिकारी ने भी की है. खान...

कैसे कहूं मैं... नेता तुम्हीं हो कल के

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‘इंसाफ की डगर पे, बच्चों दिखाओ चल के ये देश है तुम्हारा, नेता तुम्हीं हो कल के...’  कवि शकील बदायुनी का लिखा ये गीत मैंने अपने बचपन में बहुत सुना है. शायद इसी लिए मेरे जेहन में यह बात पक्की बैठ सी गई है कि इंसाफ की डगर पर चलने वाले बच्चे, कल नेता बनते है. और यह बात अगर सच है तो बच्चों को कल के नेता बनने की सलाह देने वाले शकील बदायुनी यह मानकर चल रहे है कि नेता यानी लीडर ही इस समाज को दिशा देते है. अगर इस बात पर गौर करे तो क्या आज के हमारे नेता सही मायने में ऐसे है? क्या इन नेताओं जैसा बनने के लिए हम अपने बच्चों को इस तरह का कोई गीत सुनाने की भी सोचेंगे?  यह बात आज इसलिए दिमाग में आई है क्योंकि महाराष्ट्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के कद्दावर नेता विजय वडेट्टीवार की एक तस्वीर मुझे सोशल मीडिया पर दिखाई दी. तस्वीर कांग्रेस की बाईक रैली की है. जिसमें विजय वडेट्टीवार अगुवाई करते हुए बाईक चला रहे है. मजे की बात यह है कि वडेट्टीवार ने हेलमेट नहीं पहना है. जबकि बाईक चलाते समय हेलमेट पहनना अनिवार्य है. मतलब नेताजी के लिए बाईक रैली निकालकर स्टाइल मारना जितना जरूरी है, उतना ...

वह मेरे बापू है... नफरत भुलाकर ही तुम उन्हें समझ पाओगे

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by फहीम खान, जर्नलिस्ट, नागपुर.  कल ही की बात है एक अदने से शख्स ने अमरावती में भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को लेकर कुछ आपत्तिजनक कह दिया. वैसे यह पहला मौका नहीं है जब किसी ‘नफरतवाली विचारधारा’ में यकीन रखने वाले ने महात्मा गांधी के प्रति कुछ आपत्तिजनक कहा हो. इससे पहले भी कई लोग, कई तरह की बातें कह चुके हैं. लेकिन महात्मा गांधी के कद की ऊंचाई इसी से समझ आ जाती है कि जिन अंग्रेजों ने 150 साल जिस देश पर राज किया, उसी देश के एक शख्स को कभी अपने आगे झुका न सके. ऐसे शख्स थे मोहनदास करमचंद गांधी... जी हां, ‘मेरे राष्ट्रपिता, मेरे बापू’.  असल में कुछ लोग अक्सर यह गलती कर जाते है कि उन्हें लगने लगता है कि उनका कद इतना ज्यादा हो गया है कि वह किसी के भी बारे में कुछ भी कह सकते है. लोकतंत्र में शायद यह अभिव्यक्ति की आजादी कहलाता हो लेकिन सभ्य समाज व्यवस्था में इसे ‘आगाऊपणा’ कहा जाता है. आप अपने से बड़े का सम्मान नहीं कर सकते हो, तो उसका अपमान करने की भी कोशिश नहीं करनी चाहिए. क्योंकि जब आप आसमान पर थूंकने की कोशिश करते हो ना, तो फिर आपकी थूंक आपके ही चेहरे पर गिरता है.  जिस ब...

टीवी मीडिया में कहीं एआई एंकर की बाढ़ न आ जाए...

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by फहीम खान, जर्नलिस्ट, नागपुर. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एक तेजी से विकसित होने वाला क्षेत्र है. जिसका हमारी दुनिया पर बड़ा प्रभाव पड़ रहा है.  एआई का उपयोग पहले से ही विभिन्न प्रकार के अनुप्रयोगों में किया जा रहा है. मसलन सेल्फ-ड्राइविंग कारों से लेकर चिकित्सा निदान तक. जैसे-जैसे एआई का विकास जारी है, इसका हमारे जीवन पर और भी अधिक प्रभाव पड़ने की संभावना जताई जाने लगी है.  एआई के सबसे आशाजनक इस्तेमालों में से एक स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में है. एआई का उपयोग बीमारियों का निदान करने, नए उपचार विकसित करने और मरीजों की देखभाल में सुधार करने के लिए किया जा सकता है. उदाहरण के लिए, एआई-संचालित सिस्टम मानव डॉक्टरों की तुलना में चिकित्सा छवियों का अधिक सटीक विश्लेषण कर सकते हैं. इससे तेजी से और अधिक सटीक निदान हो सकेगा. जिससे मरीज की जान भी बचाई जा सकती है.  News Anchor SANA इसी बीच भारत में भी एआई तकनीक का इस्तेमाल करने का चलन तेजी से बढ़ता नजर आने लगा है. खासकर मीडिया में एआई तकनीक का इस्तेमाल होने लगा है. जिसके बाद से लगने लगा है कि कहीं टीवी मीडिया में एआई एंकर की बाढ़ ...